विचारधारा पर भारी पड़ी हकीकत: जर्मनी क्यों लौट रहा है चीन की ओर
When ideology can’t stand up to reality: Why Germany is turning back to China
सारांश
RT के एक विश्लेषण के अनुसार, जर्मनी अपनी चीन नीति को नए सिरे से तय कर रहा है क्योंकि आर्थिक दबाव वैचारिक आपत्तियों पर भारी पड़ रहे हैं। सुस्त विकास और औद्योगिक चुनौतियों से जूझता बर्लिन, पहले की "डी-रिस्किंग" नीति के बावजूद, बीजिंग के साथ व्यापारिक और राजनयिक संबंधों को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। यह बदलाव दर्शाता है कि आर्थिक वास्तविकता, चीन से रणनीतिक दूरी बनाने के पश्चिमी दबाव से ज़्यादा ताकतवर साबित हो रही है।
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