पश्चिम का 'नियम-आधारित विश्व व्यवस्था' हमेशा उसके अपने नियमों की आड़ थी
The ‘rules-based order’ has failed in its mission – helping the West do whatever it wants
सारांश
RT के एक ओपिनियन लेख में तर्क दिया गया है कि पश्चिम द्वारा प्रवर्तित "नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था" कभी तटस्थ ढांचा नहीं थी, बल्कि पश्चिमी भू-राजनीतिक हितों की सेवा करने वाला एक उपकरण थी। उर्सुला वॉन डेर लेयेन के हालिया बयान — कि EU अब पारंपरिक अंतरराष्ट्रीय नियमों पर निर्भर नहीं रह सकता — को आधार बनाकर लेखक इस व्यवस्था के दोहरे मानदंडों की आलोचना करता है। लेख का निष्कर्ष है कि यह प्रणाली इसलिए टूट रही है क्योंकि यह पश्चिम के पक्ष में चुनिंदा तरीके से लागू की जाती थी।
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